फैसला लागू करने के लिए दो साल की मोहलत देने से इनकार
केंद्र सरकार ने फैसले को लागू करने के लिए दो साल का अतिरिक्त समय मांगा था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने यह मांग भी स्वीकार नहीं की। अदालत ने कहा कि सिविल सेवा परीक्षा (CSE) 2025 का परिणाम 6 मार्च को घोषित हो चुका है और सफल उम्मीदवारों को अभी सेवाओं का आवंटन नहीं किया गया है।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि CSE 2025 के चयनित OBC उम्मीदवारों को सेवा आवंटित करते समय क्रीमी लेयर से जुड़े नए सिद्धांतों का पालन करना होगा।
केंद्र सरकार ने इसलिए दाखिल की थी याचिका
केंद्र सरकार ने अदालत से अपने फैसले को पिछली तारीख से लागू करने के बजाय भविष्य की तारीख से प्रभावी करने का अनुरोध किया था। सरकार का तर्क था कि यदि फैसले को वर्ष 2012 से लागू किया गया, तो पहले से हो चुकी नियुक्तियों और वरिष्ठता सूचियों में बदलाव की स्थिति बन सकती है। इसका असर उन कर्मचारियों पर भी पड़ सकता है, जो इस मामले में पक्षकार नहीं हैं।
यह था सुप्रीम कोर्ट का 11 मार्च का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को केंद्र सरकार बनाम रोहित नाथन मामले में फैसला सुनाते हुए कहा था कि OBC क्रीमी लेयर का निर्धारण केवल माता-पिता की सैलरी के आधार पर नहीं किया जा सकता।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने कहा था कि क्रीमी लेयर तय करते समय माता-पिता के पद, सेवा श्रेणी और 8 सितंबर 1993 के सरकारी आदेश में निर्धारित नियमों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
इस फैसले का असर OBC आरक्षण के तहत क्रीमी लेयर निर्धारण और सिविल सेवा में चयनित उम्मीदवारों को सेवाओं के आवंटन पर पड़ सकता है।
