प्रेम कुमार, राजस्थान के जोधपुर जिले में स्थित बागोरिया माता मंदिर अपनी अनोखी धार्मिक परंपरा के कारण चर्चा में है। करीब 600 साल पुराने इस हिंदू मंदिर में एक मुस्लिम परिवार पीढ़ियों से पूजा-पाठ की जिम्मेदारी निभा रहा है। परिवार के सदस्य मंदिर में देवी की पूजा करते हैं और मुस्लिम होने के नाते अपने धर्म के अनुसार नमाज भी पढ़ते हैं।
स्थानीय जानकारी के मुताबिक इस परिवार की करीब 14 पीढ़ियां बागोरिया माता मंदिर की सेवा से जुड़ी रही हैं। मंदिर में पूजा करने वाले व्यक्ति को स्थानीय तौर पर ‘भोपा’ कहा जाता है। हाल के दिनों में मंदिर से जुड़ा एक वीडियो वायरल होने के बाद यह परंपरा फिर चर्चा में आई है।
600 साल पुराना है बागोरिया माता मंदिर
यह मंदिर जोधपुर के भोपालगढ़ क्षेत्र के बागोरिया गांव में स्थित है। स्थानीय लोगों के अनुसार बागोरिया माता गांव की कुलदेवी हैं। मंदिर को करीब 600 साल पुराना बताया जाता है और इससे कई धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। मंदिर में पूजा की जिम्मेदारी संभालने वाले मुस्लिम परिवार के पूर्वजों के यहां पहुंचने को लेकर भी स्थानीय स्तर पर कई कहानियां प्रचलित हैं।
अकाल के दौरान गांव में पहुंचा परिवार
स्थानीय मान्यता के अनुसार परिवार के पूर्वज अकाल के समय जैसलमेर से भोपालगढ़ की ओर जा रहे थे। रास्ते में उनके ऊंट का पैर टूट गया और परिवार बागोरिया गांव के पास रुक गया।
बताया जाता है कि पूर्वजों ने देवी से प्रार्थना की, जिसके बाद ऊंट ठीक हो गया। इसके बाद परिवार का इस स्थान से जुड़ाव बढ़ता गया और माता की सेवा करने की परंपरा शुरू हुई। एक अन्य स्थानीय कहानी के मुताबिक पानी और भोजन की समस्या से परेशान परिवार के एक सदस्य को सपने में बागोरिया माता के दर्शन हुए। देवी ने उन्हें पहाड़ी पर स्थित एक बावड़ी के बारे में बताया। परिवार जब वहां पहुंचा तो उसे देवी की मूर्ति मिली। इसके बाद परिवार ने वहीं रहकर माता की सेवा करने का निर्णय लिया।
नवरात्र में उमड़ते हैं श्रद्धालु
मंदिर से जुड़े परिवार के जमालुद्दीन खान और उनके बेटे समंदर खान ने बताया था कि नवरात्र के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। उनके मुताबिक मंदिर में किसी तरह का भेदभाव नहीं होता।
मंदिर में पूजा की जिम्मेदारी निभाने वाले जमालुद्दीन खान का कुछ महीने पहले निधन हो गया। इसके बाद मंदिर से जुड़ी पुरानी परंपरा का वीडियो दोबारा सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया।
किले से भी जुड़ी है एक कहानी
बागोरिया माता मंदिर से किले के निर्माण को लेकर भी एक स्थानीय कहानी जुड़ी है। बताया जाता है कि एक राजा यहां किला बनवाना चाहते थे। करीब छह महीने तक निर्माण का प्रयास किया गया, लेकिन मान्यता के अनुसार दिन में बनाई गई संरचना रात में फिर बराबर हो जाती थी।
इसके बाद यह कहानी प्रचलित हुई कि माता ने आदेश दिया कि इस स्थान पर केवल उनका ही किला रहेगा। यह कथा आज भी मंदिर से जुड़ी स्थानीय मान्यताओं का हिस्सा है।
बावड़ी को लेकर भी है आस्था
मंदिर में आने वाले श्रद्धालु यहां मौजूद बावड़ी को लेकर भी कई मान्यताएं बताते हैं। एक भक्त के मुताबिक राजस्थान के कई हिस्सों में पानी की कमी रहती है, लेकिन मंदिर के नीचे स्थित बावड़ी में पानी की कमी नहीं होने की मान्यता है। स्थानीय श्रद्धालु बागोरिया माता को आसपास के क्षेत्र के लिए आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र मानते हैं और मंदिर से जुड़े कई चमत्कारों की कहानियां सुनाते हैं।
आस्था और धार्मिक सद्भाव की मिसाल
बागोरिया माता मंदिर की सबसे खास पहचान यहां लंबे समय से चली आ रही पूजा की परंपरा है। मुस्लिम परिवार की कई पीढ़ियों से हिंदू देवी के मंदिर में पूजा की जिम्मेदारी निभाना स्थानीय धार्मिक सद्भाव की अनोखी तस्वीर पेश करता है।
मंदिर से जुड़ी चमत्कारों और घटनाओं की कहानियां स्थानीय मान्यताओं पर आधारित हैं। वहीं, परिवार की पीढ़ियों से चली आ रही सेवा की परंपरा के कारण बागोरिया माता मंदिर एक बार फिर लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
