प्रेम कुमार,दिल्ली: सत्य निकेतन में रविवार, 6 सितंबर को पांच मंजिला इमारत गिरने से कम से कम सात लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की घटना ने छात्रों के रहने की व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) में बड़ी संख्या में छात्र पढ़ते हैं, लेकिन उनके मुकाबले हॉस्टल की उपलब्धता बेहद सीमित है। ऐसे में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को निजी पीजी या किराए के मकानों पर निर्भर रहना पड़ता है।
DU में 2.5 लाख से ज्यादा छात्र, हॉस्टल बेड करीब 9 हजार
दिल्ली विश्वविद्यालय की 2024-25 की वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक विश्वविद्यालय में 2,10,907 अंडरग्रेजुएट, 34,520 पोस्टग्रेजुएट और पीएचडी तथा 6,047 सर्टिफिकेट व डिप्लोमा छात्र नामांकित थे। यानी रेगुलर मोड में पढ़ने वाले छात्रों की कुल संख्या 2.5 लाख से अधिक थी।
रिपोर्ट के अनुसार इनमें आधे से ज्यादा विद्यार्थी दिल्ली से बाहर के राज्यों से आते हैं। इसके बावजूद विश्वविद्यालय में हॉस्टल की कुल क्षमता करीब 9,000 बेड ही है। ये सुविधाएं नॉर्थ कैंपस के ग्वायर हॉल समेत करीब 20 हॉस्टलों और कुछ कॉलेजों से जुड़े हॉस्टलों में बंटी हुई हैं।
सभी छात्रों के लिए उपलब्ध नहीं हैं हॉस्टल
DU में उपलब्ध हॉस्टल की सुविधा सभी विद्यार्थियों को समान रूप से नहीं मिलती। कई हॉस्टल खास श्रेणी या विशेष पाठ्यक्रमों के छात्रों के लिए निर्धारित हैं। उदाहरण के तौर पर अरावली हॉस्टल में पीजी और शोध छात्रों के लिए व्यवस्था है, जबकि सरामति हॉस्टल मुख्य रूप से पूर्वोत्तर के पीजी छात्रों और साउथ कैंपस के शोधार्थियों के लिए है।
कुछ कॉलेजों के पास अपने हॉस्टल हैं। इनमें दौलत राम कॉलेज, हिंदू कॉलेज, किरोड़ी मल कॉलेज, मिरांडा हाउस, हंसराज कॉलेज और श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स जैसे नॉर्थ कैंपस के संस्थान तथा श्री वेंकटेश्वर कॉलेज, मैत्रेयी कॉलेज और लेडी श्रीराम कॉलेज जैसे साउथ कैंपस के कॉलेज शामिल हैं।
हालांकि, इन कॉलेजों में भी हॉस्टल की क्षमता कुल छात्र संख्या की तुलना में काफी कम है। हंसराज कॉलेज में 5,000 से अधिक छात्र होने के बावजूद 250 से भी कम विद्यार्थियों के लिए हॉस्टल की सुविधा उपलब्ध होने का उदाहरण सामने आता है।
हॉस्टल की कमी से बढ़ा निजी PG का कारोबार
सत्य निकेतन के आसपास कई प्रमुख कॉलेज स्थित हैं। श्री वेंकटेश्वर कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज, आर्यभट्ट कॉलेज और रामलाल आनंद कॉलेज के अलावा आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज, दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड कॉमर्स, जीसस एंड मैरी कॉलेज और मैत्रेयी कॉलेज भी इस क्षेत्र के आसपास हैं।
इनमें से कई संस्थानों के पास अपना हॉस्टल नहीं है। इसके चलते सत्य निकेतन और आसपास के इलाकों में निजी पीजी और किराए के आवास तेजी से बढ़े हैं। नॉर्थ कैंपस में मुखर्जी नगर और हडसन लेन भी छात्रों के लिए प्रमुख पीजी केंद्र बन चुके हैं।
बाहर से आने वाले छात्रों पर ज्यादा असर
DU में पढ़ने के लिए दूसरे राज्यों से आने वाले विद्यार्थियों के सामने हॉस्टल न मिलने पर रहने की जगह तलाशना बड़ी चुनौती बन जाता है। कम बजट वाले छात्रों को किराए, सुरक्षा और कॉलेज से दूरी जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
आईआईटी गुवाहाटी की समाजशास्त्र की असिस्टेंट प्रोफेसर रितुपर्णा पटगिरी के अनुसार, हॉस्टल की उपलब्धता का छात्रों की मानसिक स्थिति और शुरुआती शैक्षणिक अनुभव पर असर पड़ सकता है। उनके मुताबिक बाहर से आने वाले विद्यार्थियों को हॉस्टल नहीं मिलने पर सुरक्षित और किफायती आवास खुद तलाशना पड़ता है, जिसका असर उनकी आर्थिक स्थिति पर भी पड़ सकता है।
छात्राओं के लिए यह चुनौती और बढ़ सकती है। नए शहर में अकेले रहने को लेकर सुरक्षा की चिंता के कारण कई परिवार हॉस्टल के बिना छात्राओं को बाहर रहने की अनुमति नहीं देते।
किराए और सुरक्षा के बीच छात्रों की चुनौती
सत्य निकेतन, मुनिरका, महिपालपुर और जीटीबी नगर जैसे इलाके छात्रों के लिए अपेक्षाकृत सस्ते हॉस्टल और पीजी के केंद्र बन गए हैं। दूसरी ओर, आर्थिक रूप से सक्षम विद्यार्थी चाणक्यपुरी और साउथ एक्सटेंशन जैसे इलाकों में अधिक किराए पर फ्लैट ले सकते हैं।
शहरी योजनाकार सुप्तेंदु बिस्वास के मुताबिक छात्रों के लिए आवास की व्यवस्था किसी व्यापक योजना का हिस्सा नहीं रही, बल्कि यह काफी हद तक बढ़ते किराए और व्यावसायिक मांग के आधार पर विकसित हुई है।
दूसरे देशों में अपनाया जा रहा अलग मॉडल
दुनिया के कई बड़े शिक्षा केंद्रों में छात्र आवास की समस्या से निपटने के लिए ‘पर्पस-बिल्ट स्टूडेंट एकोमोडेशन’ यानी PBSA मॉडल अपनाया गया है। इसमें विशेष रूप से छात्रों के रहने के लिए इमारतों का निर्माण और संचालन किया जाता है।
ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में यह मॉडल व्यापक रूप से इस्तेमाल होता है। लंदन में ऐसे आवासों में किफायती श्रेणी के कमरे रखने और उच्च शिक्षण संस्थानों के साथ औपचारिक जुड़ाव जैसे प्रावधानों पर जोर दिया जाता है। परिवहन की सुविधा भी इस व्यवस्था का अहम हिस्सा है।
सत्य निकेतन हादसे के बाद प्रशासन पर नजर
सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के बाद दिल्ली में छात्रों और किराएदारों के रहने की जगहों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे के दिन घटनास्थल पर करीब तीन घंटे बिताकर स्थिति का जायजा लिया और बाद में अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की।
हादसे ने यह सवाल फिर सामने ला दिया है कि दिल्ली जैसे बड़े शिक्षा केंद्र में लाखों छात्रों के लिए सुरक्षित, किफायती और पर्याप्त आवास की व्यवस्था कैसे सुनिश्चित की जाए। DU में सीमित हॉस्टल क्षमता के कारण बड़ी संख्या में छात्रों का निजी पीजी और किराए के मकानों पर निर्भर रहना इस चुनौती को और गंभीर बनाता है।
