प्रेम कुमार रायपुर: गणेशोत्सव 2026 में आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के लिए रायपुर केंद्रीय जेल के बंदियों ने अनूठी पहल की है। करीब 10 बंदियों ने प्राकृतिक मिट्टी और रंगों से भगवान गणेश की 500 पर्यावरण-अनुकूल प्रतिमाएं तैयार की हैं। इन प्रतिमाओं की खासियत यह है कि इनमें तुलसी समेत विभिन्न पौधों के बीज शामिल किए गए हैं। गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के बाद मिट्टी और पानी के संपर्क में आने पर इनमें मौजूद बीजों के अंकुरित होने की परिकल्पना की गई है। यानी इन गणपति प्रतिमाओं का संदेश विसर्जन के बाद भी हरियाली के रूप में आगे बढ़ सकता है।
500 गणेश प्रतिमाओं में छिपा ‘ग्रीन’ संदेश
रायपुर केंद्रीय जेल में तैयार की गई इन प्रतिमाओं का आकार करीब 1 से 2 फीट रखा गया है। इन्हें बनाने में प्राकृतिक मिट्टी और प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल किया गया है। मूर्तियों में विभिन्न पौधों के बीज भी डाले गए हैं। इस पहल का उद्देश्य धार्मिक आस्था को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना है। इसके जरिए प्लास्टर ऑफ पेरिस और कृत्रिम रंगों से बनी प्रतिमाओं के बजाय पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाओं को अपनाने का संदेश दिया जा रहा है।

विसर्जन के बाद पौधे बनने की उम्मीद
इन बीजयुक्त प्रतिमाओं को विसर्जित करने के बाद मिट्टी में मौजूद बीजों के अंकुरित होने की परिकल्पना की गई है। ऐसे में गणेश प्रतिमा का जीवन विसर्जन के साथ समाप्त होने के बजाय पौधे के रूप में एक नई शुरुआत का प्रतीक बन सकता है।
10 बंदियों ने दिखाई रचनात्मकता
करीब 10 बंदियों ने मिलकर इन 500 प्रतिमाओं को तैयार किया है। मिट्टी को आकार देने से लेकर प्रतिमाओं को आकर्षक रूप देने तक उन्होंने अपनी मेहनत और रचनात्मकता का प्रदर्शन किया।
जेल में इस तरह की गतिविधियों के जरिए बंदियों को कौशल विकास और उत्पादन कार्यों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इससे उन्हें अपनी प्रतिभा और हुनर को सकारात्मक दिशा में इस्तेमाल करने का अवसर मिलता है।

आस्था, पर्यावरण और पुनर्वास का संगम
जेल प्रशासन के मुताबिक बीजयुक्त गणेश प्रतिमाओं की पहल धार्मिक आस्था, पर्यावरण संरक्षण, कौशल विकास और बंदियों के पुनर्वास को एक साथ जोड़ती है। ऐसी रचनात्मक गतिविधियां बंदियों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें समाजोपयोगी कार्यों से जोड़ने में मदद करती हैं।
रायपुर केंद्रीय जेल के अधीक्षक योगेश सिंह क्षत्री ने कहा कि बंदियों के पुनर्वास और आत्मनिर्भरता के लिए लगातार कौशल विकास एवं उत्पादन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। उनके मुताबिक बीजयुक्त पर्यावरण-अनुकूल गणेश प्रतिमाएं यह संदेश देती हैं कि आस्था और प्रकृति संरक्षण साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।
क्यों खास हैं ये ‘ग्रीन गणपति’
- प्राकृतिक मिट्टी से तैयार प्रतिमाएं
- प्राकृतिक रंगों का इस्तेमाल
- करीब 500 गणेश प्रतिमाएं तैयार
- प्रतिमाओं का आकार करीब 1 से 2 फीट
- तुलसी समेत विभिन्न पौधों के बीज शामिल
- विसर्जन के बाद बीजों के अंकुरित होने की परिकल्पना
- करीब 10 बंदियों ने किया निर्माण
- धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
