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हाईकोर्ट ने यौन उत्पीड़न केस की पुरानी जांच मानी दोषपूर्ण, नई समिति से जांच के आदेश

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने जांच समिति के गठन में कानूनी प्रावधानों की अनदेखी मानते हुए पुरानी रिपोर्ट रद्द की, अब नई समिति करेगी मामले की जांच

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के यौन उत्पीड़न मामले में नई जांच के आदेश छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के यौन उत्पीड़न मामले में नई जांच के आदेश

प्रेम कुमार, छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट: ने राज्य पाठ्यपुस्तक निगम के तत्कालीन महाप्रबंधक अरविंद कुमार पांडेय के खिलाफ लगाए गए यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच को लेकर अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने पुरानी आंतरिक शिकायत समिति के गठन को कानून के अनुरूप नहीं माना और उसके आधार पर तैयार की गई जांच रिपोर्ट को शून्य घोषित कर दिया। अब मामले की नए सिरे से जांच होगी।

मार्च 2022 में दर्ज हुई थी शिकायत

मामले में निगम की एक स्टेनो टाइपिस्ट ने मार्च 2022 में तत्कालीन महाप्रबंधक के खिलाफ शिकायत की थी। इसके बाद निगम ने पांच सदस्यीय आंतरिक शिकायत समिति गठित कर मामले की जांच कराई थी। हालांकि, शिकायतकर्ता ने समिति के गठन और जांच प्रक्रिया पर आपत्ति जताई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि समिति में शामिल अधिकारी तत्कालीन महाप्रबंधक से कनिष्ठ थे। उन्होंने समिति में महिला सदस्य नहीं होने को लेकर भी सवाल उठाए थे। शिकायत में तत्कालीन महाप्रबंधक पर कार्यालय में अनुचित व्यवहार, अशोभनीय इशारों और आपत्तिजनक प्रस्ताव देने के आरोप लगाए गए थे।

समिति के गठन पर हाईकोर्ट ने उठाया सवाल

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने आंतरिक शिकायत समिति के गठन से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर गौर किया। कोर्ट ने कहा कि समिति में वरिष्ठ महिला अधिकारी को पीठासीन अधिकारी बनाया जाना जरूरी है और कम से कम आधे सदस्य महिलाएं होनी चाहिए। निगम की ओर से दलील दी गई कि महिला कर्मचारियों की संख्या कम होने के कारण समिति में महिला सदस्यों को शामिल नहीं किया जा सका। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थिति में किसी दूसरे कार्यालय या प्रशासनिक इकाई से वरिष्ठ महिला अधिकारी को समिति में शामिल किया जा सकता था।

पुरानी जांच रिपोर्ट हुई शून्य

हाईकोर्ट ने समिति के मूल गठन को ही दोषपूर्ण मानते हुए उसके आधार पर की गई पूरी जांच और रिपोर्ट को शून्य कर दिया। कोर्ट ने अब कानून के अनुरूप नई समिति गठित कर शिकायत की दोबारा जांच करने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश के बाद मामले की जांच नई समिति द्वारा निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाएगी। यानी पुरानी समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई नहीं होगी और शिकायत पर नए सिरे से जांच की जाएगी।

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