प्रेम कुमार, भारतीय जनता पार्टी ने अपने संगठन को मजबूत करने की दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर सात प्रमुख मोर्चों के नए प्रभारी नियुक्त किए हैं। इनमें महिला, युवा, किसान, OBC, SC, ST और अल्पसंख्यक मोर्चे शामिल हैं। पार्टी ने अलग-अलग नेताओं को इन मोर्चों की जिम्मेदारी सौंपी है। नई नियुक्तियों का उद्देश्य संबंधित मोर्चों की गतिविधियों को गति देना और संगठन के साथ बेहतर तालमेल कायम करना है।
किसे मिला कौन सा प्रभार
बीजेपी की ओर से जारी सूची के मुताबिक सातों मोर्चों के नए प्रभारी हैं:
- महिला मोर्चा: डी. पुरंदेश्वरी
- युवा मोर्चा: हरीश द्विवेदी
- OBC मोर्चा: वैजयंत पांडा
- SC मोर्चा: संजय भाटिया
- ST मोर्चा: सतीश पूनिया
- किसान मोर्चा: लाल सिंह आर्या
- अल्पसंख्यक मोर्चा: गजेंद्र पटेल
इन नेताओं को संबंधित मोर्चों की संगठनात्मक गतिविधियों को आगे बढ़ाने और पार्टी के साथ समन्वय मजबूत करने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
मोर्चों के राष्ट्रीय अध्यक्षों की भी नियुक्ति
बीजेपी पहले ही विभिन्न मोर्चों के राष्ट्रीय अध्यक्षों का ऐलान कर चुकी है। गुजरात के लोकसभा सांसद डॉ. हेमांग जोशी को युवा मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है। छत्तीसगढ़ की नेता रूप कुमारी चौधरी को महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी मिली है। वहीं मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद बंसीलाल गुर्जर किसान मोर्चा और अमरपाल मौर्य OBC मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किए गए हैं। इसके अलावा शिवेश कुमार राम को SC मोर्चा, मन्नालाल रावत को ST मोर्चा और कुंवर बासित अली को अल्पसंख्यक मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया है।
संगठन में लगातार हो रहे बदलाव
बीजेपी में संगठनात्मक स्तर पर हाल में कई महत्वपूर्ण नियुक्तियां हुई हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं विनोद तावड़े को राष्ट्रीय महासचिव के साथ उत्तर प्रदेश का प्रभारी बनाया गया है। सुनील बंसल राष्ट्रीय महासचिव की भूमिका में बने हुए हैं और बीएल संतोष राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इसके अलावा तरुण चुघ को केंद्रीय कार्यालय का प्रभारी, संदीप पाठक को राष्ट्रीय सचिव और डॉ. संबित पात्रा को नॉर्थ-ईस्ट कोऑर्डिनेशन की जिम्मेदारी दी गई है।
बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने की तैयारी
बीजेपी की नई नियुक्तियों को संगठन की आगामी रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है। पार्टी के अलग-अलग मोर्चों के जरिए सामाजिक और राजनीतिक वर्गों के बीच संगठन की पहुंच बढ़ाने पर जोर रहेगा। नई टीम कार्यकर्ताओं के साथ बेहतर समन्वय, संगठनात्मक गतिविधियों में तेजी और बूथ स्तर तक पार्टी की पकड़ मजबूत करने पर काम करेगी। आने वाले चुनावों को देखते हुए इन मोर्चों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है।
