प्रेम कुमार, गणेश उत्सव के दौरान भगवान गणेश की स्थापना से लेकर विसर्जन तक कई धार्मिक परंपराएं निभाई जाती हैं। इनमें विसर्जन से पहले की जाने वाली उत्तर पूजा और इसके बाद गणपति की मूर्ति को थोड़ा आगे खिसकाने की परंपरा भी शामिल है। कई लोगों के मन में सवाल रहता है कि पूजा के बाद मूर्ति को उसके स्थान से क्यों हटाया जाता है और इसका धार्मिक अर्थ क्या है। साल 2026 में गणेश उत्सव की शुरुआत 14 सितंबर से हुई है। 10 दिवसीय गणेश उत्सव का समापन 25 सितंबर को अनंत चतुर्दशी के दिन होगा। हालांकि, अलग-अलग घरों और स्थानों पर अपनी परंपरा के अनुसार डेढ़ दिन, तीन, पांच या सात दिन बाद भी गणपति विसर्जन किया जाता है।
क्या होती है उत्तर पूजा
उत्तर पूजा को गणपति बप्पा को विदाई देने से पहले की जाने वाली पूजा माना जाता है। इसमें भगवान गणेश की विधिवत पूजा-अर्चना और आरती की जाती है। इसके बाद भक्त परिवार पर भगवान की कृपा बनाए रखने की प्रार्थना करते हैं।
धार्मिक परंपरा में उत्तर पूजा का भाव भगवान गणेश को सम्मानपूर्वक विदाई देने से जुड़ा माना जाता है। जिस तरह स्थापना के समय भक्त भगवान गणेश का स्वागत करते हैं, उसी तरह विसर्जन के समय भी विधि-विधान के साथ उन्हें विदा किया जाता है।
उत्तर पूजा के बाद मूर्ति को क्यों खिसकाते हैं
उत्तर पूजा पूरी होने के बाद गणपति की मूर्ति को उसके स्थापित स्थान से थोड़ा आगे खिसकाने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसे इस बात का प्रतीकात्मक संकेत माना जाता है कि अब बप्पा अपने आसन से प्रस्थान कर रहे हैं और विसर्जन के लिए आगे बढ़ रहे हैं।
इसलिए मूर्ति को खिसकाना केवल स्थान बदलना नहीं माना जाता, बल्कि इसे गणपति की विदाई की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इसके बाद भक्त गणपति बप्पा को श्रद्धा के साथ विसर्जन स्थल तक लेकर जाते हैं।
यह परंपरा स्थापना से कैसे जुड़ी है
गणपति स्थापना के समय भक्त भगवान गणेश को अपने घर या पूजा स्थल पर आमंत्रित करते हैं। इसके बाद उत्सव के दौरान उनकी पूजा, आरती और भोग लगाया जाता है। जब विसर्जन का समय आता है तो उत्तर पूजा के माध्यम से उनसे विदाई ली जाती है। मूर्ति को थोड़ा आगे खिसकाने की परंपरा भी इसी विदाई भाव से जुड़ी मानी जाती है। मान्यता के अनुसार, इससे संकेत मिलता है कि बप्पा अब अपने स्थापित स्थान से आगे बढ़ चुके हैं और विसर्जन की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
अगले साल फिर आने की कामना
गणपति विसर्जन के दौरान भक्त भगवान गणेश से अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना करते हैं। साथ ही परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और मंगल बनाए रखने की कामना की जाती है। इस तरह उत्तर पूजा और उसके बाद गणपति की मूर्ति को थोड़ा खिसकाने की परंपरा गणेश उत्सव की विदाई से जुड़ा एक प्रतीकात्मक धार्मिक विधान है। इसके माध्यम से भक्त श्रद्धा और सम्मान के साथ गणपति बप्पा को विदा करने की शुरुआत करते हैं।
