जल संसाधन विभाग रायपुर में 70 लाख से अधिक का खेल! बिना टेंडर जारी किए लाखों के बाटे काम। 

जल संसाधन विभाग रायपुर EE आर.के. शर्मा और तत्कालीन SDO विजय वाहने पर कमीशनखोरी का लगा गंभीर आरोप।

प्रेम कुमार PMN 24 NEWS: रायपुर। जल संसाधन विभाग रायपुर में एक बार फिर भ्रष्टाचार का बड़ा मामला सामने आया है। विभाग के कार्यपालन अभियंता (EE) आर.के. शर्मा और तत्कालीन SDO विजय वाहने पर आरोप है कि उन्होंने शासन के नियमों को ताक पर रखकर विधायक निधि के पैसों की खुली बंदरबाट की। शिकायतकर्ता के अनुसार, हाई मास्ट स्ट्रीट लाइटिंग लगाने के नाम पर 70 लाख रुपये से अधिक के कार्य बिना किसी टेंडर प्रक्रिया के एक ही फर्म को दे दिए गए। यह पूरा मामला न सिर्फ विभागीय भ्रष्टाचार को उजागर करता है, बल्कि सरकारी निगरानी व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। RED MORE:जल संसाधन विभाग रायपुर में बड़ा भ्रष्टाचार उजागर: EE आर.के. शर्मा और SDO पर करोड़ों की कमीशनखोरी का आरोप।

एक ही फर्म को नियम विरुद्ध टेंडर जारी अधिकारी को मिल रहा संरक्षण, ठेकेदार ने मानक स्तर की सामग्री का किया सप्लाई।

PMN 24 NEWS: विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, रायपुर के MG रोड, मेघदूत कॉम्प्लेक्स स्थित फर्म PRA INFRA PROJECTS, Raipur को नियम विरुद्ध संरक्षण दिया गया। अधिकारियों ने GeM पोर्टल ID – C29A200001456660 के माध्यम से काम को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर कई वर्क ऑर्डर जारी किए, ताकि टेंडर प्रक्रिया से बचा जा सके। आरोप है कि फर्म ने बिना ब्रांड और अमानक स्तर के 20 फीट हाई मास्ट स्ट्रीट लाइटिंग टॉवर 12 LED फ्लड लाइटिंग सिस्टम की सप्लाई की। जब शिकायतकर्ता ने बाजार में इसी तरह की हाई मास्ट लाइटिंग का अनुमान लिया, तो खुलासा हुआ कि उच्च गुणवत्ता वाली ब्रांडेड सामग्री 70–80 हजार रुपये में उपलब्ध है। इसके बावजूद विभाग ने एक ही वर्क ऑर्डर में 3,89,575 रुपये का भुगतान कर दिया, जो बाजार मूल्य से कई गुना अधिक बताया जा रहा है। RED MORE :छत्तीसगढ़ में जमीन और मकान की कीमत तय करने के नए नियम लागू, पुराने मकानों पर रियायत।

विधायक निधि भी सवालों के घेरे में,जांच से बचने ऑफिस से फाइल हुआ गायब। 

PMN 24 NEWS: मामले में यह भी आरोप है कि ठेकेदार ने अपनी राजनीतिक पहुंच का इस्तेमाल करते हुए भाटापारा कांग्रेस विधायक इंद्र कुमार साव से विधायक निधि फंड से मोटी कमीशन के बदले लाखों रुपये का भुगतान मंजूर करवाया। जब हमारी मीडिया टीम ने जल संसाधन विभाग रायपुर के जिम्मेदार अधिकारियों से सवाल किए, तो तत्कालीन SDO विजय वाहने ने गोलमोल जवाब दिए। आरोप है कि इसके बाद ठेकेदार और अधिकारी की मिलीभगत से कार्यालय से संबंधित फाइल ही गायब कर दी गई। सरकारी कार्यालय से फाइल का गायब होना इस बात का सबसे बड़ा सबूत माना जा रहा है कि कैसे सरकारी दस्तावेजों के साथ छेड़छाड़ कर भ्रष्टाचार को दबाने की कोशिश की गई।RED MORE:रायपुर में टीम इंडिया की पहली हार,कोहली का शतक भी न बचा सका मैच,आख़िरी ओवर में अफ्रीका ने छीनी जीत।।

विभाग में अधिकारी और ठेकेदार के मिलभग से लाखों का भ्रष्टाचार को लेकर आम जनता का सरकार से सीधा सवाल। 

क्या जल संसाधन विभाग के उच्च अधिकारी दोषियों पर कार्रवाई करेंगे?

क्या सरकार PRA INFRA PROJECTS, Raipur को दिए गए वर्क ऑर्डर रद्द कर फर्म को ब्लैकलिस्ट करेगी?

या फिर यह मामला भी फाइलों के साथ ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा?

प्रदेश में हुए इस कथित करोड़ों के भ्रष्टाचार ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या सिस्टम में बैठे लोग ही सिस्टम को लूट रहे हैं।

Over 70 lakh rupees worth of scams are going on in the Raipur Water Resources Department! Lakhs of rupees worth of work was awarded without tenders being issued.

 

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