प्रेम कुमार PMN 24 NEWS/ रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में जिंदल पावर की गारे–पेलमा सेक्टर-1 कोयला खदान के विरोध में चल रहा ग्रामीणों का आंदोलन शुक्रवार (27 दिसंबर 2025) को हिंसक हो गया। मनार सीएचपी चौक पर धरना दे रहे ग्रामीणों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई, जिसमें थाना प्रभारी टीआई कमला पुसाम गंभीर रूप से घायल हो गईं। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, स्थिति तब बिगड़ी जब पुलिस ने धरना स्थल से प्रदर्शनकारियों को हटाने की कोशिश की। आक्रोशित भीड़ ने पथराव कर पुलिस टीम पर हमला कर दिया। इस दौरान एक बस और कंपनी से जुड़े वाहनों में आग लगा दी गई, वहीं कई वाहनों में तोड़फोड़ भी की गई। आगजनी और पथराव से इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही एसपी स्वयं मौके पर पहुंचे और अतिरिक्त बल तैनात किया गया। देर शाम तक क्षेत्र में तनाव बना रहा। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल की तैनाती की है। RADE MORE: शराब घोटाला: ED की सबसे बड़ी कार्रवाई, 68 करोड़ की डिस्टलरी संपत्ति कुर्क।

8 दिसंबर की ‘फर्जी’ जनसुनवाई बना आंदोलन की वजह।
PMN 24 NEWS: ग्रामीणों का कहना है कि 8 दिसंबर को हुई कथित “फर्जी” जनसुनवाई के आधार पर खदान परियोजना को आगे बढ़ाया जा रहा है। 14 गांवों के लोग भूमि अधिग्रहण, विस्थापन और बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण का विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र पहले से कई खदानों के दुष्प्रभाव झेल रहा है—हवा-पानी दूषित है और आजीविका पर संकट गहराता जा रहा है। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि PESA कानून के तहत ग्राम सभा की वास्तविक सहमति के बिना किसी भी तरह का अधिग्रहण या खनन न किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी आवाज को दबाने के लिए पुलिसिया दबाव बनाया जा रहा है।RADE MORE:विवादों के बाद DSP कल्पना वर्मा की पहली तस्वीर आया सामने, SSP कार्यालय पहुंचकर कराई बयान दर्ज।
पुलिस कार्रवाई पर सवाल, कंपनी-प्रशासन की भूमिका सवालों के कटघरे में।
PMM 24 NEWS: घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई और कंपनी-प्रशासन की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महिला टीआई पर हुए हमले की निंदा के साथ-साथ स्थानीय लोग पूछ रहे हैं कि विवादित जनसुनवाई और ग्रामीणों की अनसुनी ने हालात को यहां तक क्यों पहुंचाया? प्रशासन का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी। वहीं ग्रामीण संगठनों ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और तेज होगा। स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। प्रशासन-कंपनी और ग्रामीणों के बीच संवाद के बिना समाधान मुश्किल दिख रहा है। RADE MORE:जल संसाधन विभाग रायपुर में 70 लाख से अधिक का खेल! बिना टेंडर जारी किए लाखों के बाटे काम।

