एक ही दिन में करोड़ों के वर्क ऑर्डर, नियमों की धज्जियां उड़ाकर आदिवासी विभाग में महाघोटाला ! 

प्रेम कुमार PMN 24 NEWS: RAIPUR/ छत्तीसगढ़ के आदिम जाति/अनुसूचित जाति विकास विभाग, रायपुर में एक बार फिर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार का सनसनीखेज मामला सामने आया है। शिकायतकर्ता ने विभाग के तत्कालीन सहा आयुक्त विजय सिंह कंवर पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उन्होंने राज्य शासन के राजपत्र और भंडार क्रय नियमों को दरकिनार कर रायपुर की दो फर्मों ड्रोलिया इंटरप्राइजेज और गोयल इंडस्ट्रीज  को एक ही दिन में टुकड़ों-टुकड़ों में करोड़ों रुपए के वर्क ऑर्डर जारी किए। शिकायत के अनुसार, राज्य सरकार द्वारा आदिम जाति/अनुसूचित जाति विकास विभाग के अंतर्गत संचालित 57 आश्रम, प्री-मैट्रिक एवं पोस्ट-मैट्रिक छात्रावासों में खेलकूद एवं आवश्यक सामग्री की आपूर्ति के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। विभाग ने रायपुर के MG रोड स्थित कपिल कॉप्लेक्स में संचालित सप्लायर फार्म ड्रोलिया इंटरप्राइजेज और गोयल इंड्रस्ट्रीज पर जेम पोर्टल के माध्यम से छात्रावास में खेल कूद सामग्री की सप्लाई में करोड़ों रुपए भ्रष्टाचार करने का गंभीर आरोप लगा है। इसके बावजूद आदिम जाति विकास विभाग रायपुर तत्कालीन सहा आयुक्त विजय सिंह कंवर के मिलीभगत से सीमित निविदा (टेंडर) प्रक्रिया अपनाए बिना, सीधे L1 मोड पर खरीदी कर नियमों को ताक पर रख दिया गया।  RADE MORE: जल संसाधन विभाग रायपुर में 70 लाख से अधिक का खेल! बिना टेंडर जारी किए लाखों के बाटे काम। 

GEM पोर्टल बना कमाई का जरिया भीतरखाने मिलीभगत से वर्क ऑर्डर की शर्तें भी हवा में।

PMN 24 NEWS: विभागीय सूत्रों के मुताबिक,छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियमों के अनुसार इतनी बड़ी राशि की खरीदी के लिए GEM पोर्टल पर निविदा आमंत्रित करना अनिवार्य था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। आरोप है कि तत्कालीन आयुक्त और सप्लायर विष्णु ड्रोलिया की मिलीभगत से सरकारी खजाने पर करीब 1 करोड़ रुपए से अधिक का डाका डाला गया।ड्रोलिया इंटरप्राइजेज और गोयल इंडस्ट्रीज दोनों फर्में रायपुर के एमजी रोड स्थित कपिल कॉम्प्लेक्स से संचालित बताई जा रही हैं। संदेह जताया जा रहा है कि दोनों फर्में एक ही परिवार से जुड़ी हैं और अधिकांश खरीदी इन्हीं से की गई। विभाग से 18 जून 2025 को एक ही दिन में टुकड़ों टुकड़ों में 85 आइटम को 1 करोड़ से अधिक सामग्री की खरीदी की गई है।विभागीय वर्क ऑर्डर में स्पष्ट निर्देश था कि 3 जुलाई 2025 तक छात्रावासों में सामग्री पहुंचाई जाए, लेकिन रायपुर जिले के अधिकांश छात्रावासों में आज तक सप्लाई नहीं हो पाई। जहां सामग्री पहुंची भी, वहां बिना ब्रांड, घटिया और अमानक सामान भेजा गया। कई खेलकूद सामग्री टूट-फूट कर कबाड़ की स्थिति में पाई गई है। RADE MORE: छत्तीसगढ़ में जमीन और मकान की कीमत तय करने के नए नियम लागू, पुराने मकानों पर रियायत

500 का सामान 6000 में, 50 हजार में एक-एक आइटम,राजपत्र 2025 की खुली अवहेलना!

PMN 24 NEWS: शिकायतकर्ता का आरोप है कि सप्लायर ने बाजार मूल्य से कई गुना अधिक दरों पर सामग्री सप्लाई की। 500 रुपए कीमत वाला सामान 6000 रुपए में सप्लायर ने सप्लाई की है कई आइटम 50,000 रुपए प्रति यूनिट तक खरीदे गए इस तरह से करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान पहुंचाया गया।राज्य सरकार के राजपत्र (गजट) 2025 की कंडिका क्रमांक-8 में साफ उल्लेख है कि 50,000 रुपए से अधिक की खरीदी बिना अनुमति और निविदा प्रक्रिया के नहीं की जा सकती, लेकिन इसके बावजूद 18 जून 2025 को एक ही दिन में 85 अलग-अलग वर्क ऑर्डर जारी कर 1 करोड़ से अधिक की खरीदी कर ली गई। हालांकि शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है जेम पोर्टल के माध्यम से छात्रावास में की गई  सप्लाई पर आदिम जाति विकास विभाग रायपुर के तत्कालीन सहा आयुक्त विजय सिंह कंवर और ठेकेदार विष्णु ड्रोलिया के साथ मिलकर सरकारी खजाने पर डाका डाला है।RADE MORE:विवादों के बाद DSP कल्पना वर्मा की पहली तस्वीर आया सामने, SSP कार्यालय पहुंचकर कराई बयान दर्ज। 

पहले भी उजागर हो चुके हैं घोटाले,सवालों के घेरे में विभागीय कार्यशैली।

PMN 24 NEWS: आदिवासी विभाग में भ्रष्टाचार के मामले उजागर होने पर मीडिया में प्रमुखता से समाचार आपने के बाद विभाग ने आनंद-फांनन में जारी वर्क ऑडर को टंकन त्रुटि बताते हुए जारी वर्क ऑडर को निरस्त करना पड़ा। छत्तीसगढ़ प्रदेश में आदिवासी जाति विकास विभाग रायपुर यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले श्रीराम इंटरप्राइजेज, रायपुर द्वारा छात्रावासों में मिड-डे किचन सेट के नाम पर 200 रुपए के स्टील का बर्तन जग को 23,000 रुपए में खरीदे जाने का मामला मीडिया में उजागर हुआ था। तब विभाग को आनन-फानन में वर्क ऑर्डर को टंकण त्रुटि बताकर निरस्त करना पड़ा था। छत्तीसगढ़ में लगातार सामने आ रहे मामलों से आदिम जाति विकास विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि राजनीतिक पहुंच के दम पर ठेकेदार अधिकारी पर दबाव बनाकर फर्जी वर्क ऑर्डर निकलवा लेते हैं,जबकि अधिकारी बाद में GEM पोर्टल का हवाला देकर जिम्मेदारी से बच निकलते हैं।अब बड़ा सवाल यह है कि क्या इस महाघोटाले की निष्पक्ष जांच होगी या फिर मामला भी फाइलों में दबा दिया जाएगा? RADE MORE:शराब भट्टी के सामने अवैध शराब माफिया ने  व्यापारी और कर्मचारियों पर की जानलेवा हमला,घटना के 3 दिन बाद थाने में नहीं हुआ मामला दर्ज

 

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