प्रेम कुमार PMN 24 CG NEWS: रायपुर। जल संसाधन विभाग रायपुर में भ्रष्टाचार का ताजा मामला सामने आया है, जिसमें विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत से सप्लाई में करोड़ों रुपए के गबन का आरोप लगा है। विभाग के इलेक्ट्रिक विंग के EE आर.के. शर्मा और तत्कालीन SDO विजय वाहने द्वारा हाई मास्ट लाइट सप्लाई में मनमानी कर भारी कमीशनखोरी करने की बात उजागर हुई है। सूत्रों के अनुसार दोनों अधिकारियों ने अपने पसंदीदा ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए शासन के राजपत्रीय गजट में दर्ज आदेशों की खुली उल्लंघना की। सरकारी नियमों को ताक पर रखकर की गई इस अवैध सप्लाई और भुगतान प्रक्रिया ने पूरे विभाग की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।राज्य सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ में GeM पोर्टल प्रणाली लागू करने का उद्देश्य यह था कि सरकारी खरीद बिना बिचौलियों के, पारदर्शी और बाजार कीमतों पर की जा सके। परंतु विभाग के अधिकारियों ने इस प्रक्रिया को धता बताते हुए जेम पोर्टल की गोपनीयता भंग कर भारी भरकम कमीशन वसूली का खेल रच दिया।खबर है कि EE राकेश कुमार शर्मा, जो पूरे मामले का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है, जिन्होंने सरकारी खरीद के मानकों को दरकिनार कर निर्देशों को नज़रअंदाज़ किया और भ्रष्टाचार की सारी हदें पार कर दीं। RED MORE :बिरनपुर हिंसा मामले में ढाई साल बाद पहली गवाही, मृतक भुनेश्वर साहू के भाई ने कोर्ट में दी हाजिर

बिना टेंडर 80 लाख का काम बांटा! जल संसाधन विभाग के EE–SDO पर मनमानी का आरोप।
PMN 24 CG NEWS: जल संसाधन विभाग में बड़े स्तर पर अनियमितता का गंभीर मामला सामने आया है। विभाग के अधिकारियों EE राकेश कुमार शर्मा और तत्कालीन SDO विजय वाहने पर शासन के राजपत्रित नियमों की खुलेआम अनदेखी कर एक ही फर्म को बिना टेंडर 80 लाख रुपये से अधिक का काम बांटने के आरोप लगे हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, दोनों अधिकारियों ने रायपुर के MG रोड मेघ दूत कॉम्प्लेक्स स्थित फर्म में PRA INFRA PROJECTS के ठेकेदार प्रणय जायसवाल को नियम विरुद्ध संरक्षण दिया और फर्जी तरीके से अलग–अलग टुकड़ों में कई वर्क ऑर्डर जारी किए। अधिकारियों ने PRA INFRA PROJECTS RAIPUR की GeM पोर्टल ID C29A200001456660 पर बिना ब्रांड और अमानक सामग्री वाले 20 फीट हाई मास्ट स्ट्रीट लाइटिंग टॉवर 12 एलईडी फ्लड लाइटिंग सिस्टम के साथ अच्छे से अच्छी क्वॉलिटी की लाईट ब्रांड के साथ 70 से 80 हजार रुपए में उपलब्ध हो जाता है लेकिन विभाग से की गई सप्लाई ने तो 389,575 लाखों रुपए के आर्क ऑर्डर जारी करवाए। इन दरों को बाजार मूल्य से कई गुना अधिक बताया जा रहा है। RED MORE : शराब घोटाला मामले में ED ने चैतन्य बघेल की 61.20 करोड़ की संपत्ति कुर्क, 364 प्लॉट और चल संपत्ति अटैच।

SDO से पासवर्ड लेकर एक ही पसंदीदा फर्म को दिए करोड़ों का काम, वह भी बाजार मूल्य से कई गुना अधिक!
PMN 24 CG NEWS: विभागीय सूत्र बताते हैं कि सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि EE राकेश शर्मा ने 05 मई 2025 को SDO विजय वाहने के जेम पोर्टल के आधिकारिक ID और पासवर्ड से PRA INFRA PROJECTS के दे दी। ठेकेदार प्रणय जायसवाल ने अधिकारी आईडी पासवर्ड से लगातार 05, 06 और 07 मई 2025 को 15–20 मिनट के अंतराल में बिना किसी प्रक्रिया के लगभग 80 लाख रुपये से अधिक के वर्क ऑर्डर जारी कर दिए। विशेषज्ञ बताते हैं कि बिना टेंडर और बिना प्रतिस्पर्धा के इस तरह के वर्क ऑर्डर जारी करना कई फर्मों के प्रतिस्पर्धा के अधिकार का हनन है। कई कंपनियों को इस प्रक्रिया में शामिल होने का मौका ही नहीं दिया गया। विभाग में हुए इस कथित प्रकरण को लेकर अधिकारी वर्ग में भी नाराजगी देखी जा रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की जा रही है। RED MORE :
छत्तीसगढ़ पर बढ़ता कर्ज़ का बोझ! 7 महीनों में 25,000 करोड़ का लोन, जेम पोर्टल में भ्रष्टाचार से बढ़ी सरकार की मुश्किलें।
PMN 24 CG NEWS: छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेशवासियों को शासकीय योजनाओं का लाभ समय पर दिलाने और विकास कार्यों की गति बनाए रखने के उद्देश्य से सितंबर 2024 तक पिछले सात महीनों में आरबीआई से 25,000 करोड़ रुपये का कर्ज़ लिया है। सरकार का कहना है कि यह उधारी पूरी तरह आरबीआई के निर्धारित मानकों और नियमों के तहत ली गई है, जिससे प्रदेश की विकास योजनाएं प्रभावित न हों। लेकिन दूसरी ओर शासकीय विभागों में हो रहा भ्रष्टाचार राज्य की आर्थिक स्थिति को और गंभीर बना रहा है। जेम (GeM) पोर्टल के माध्यम से खरीदी जाने वाली सामग्री में अमानक स्तर के नॉन-ब्रांडेड सामान बाजार मूल्य से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदे जाने के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से शासकीय योजनाओं के नाम पर खुलेआम भ्रष्टाचार कर सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। जल संसाधन विभाग में कमीशनखोरी का स्तर इतना बढ़ चुका है कि नीचे के कर्मचारी से लेकर उच्च अधिकारी और यहां तक कि विभागीय मंत्री तक पर सवाल उठ रहे हैं। सरकारी खजाने पर इस बेवजह की लागत का सीधा असर पड़ा है, जिससे राज्य पर अतिरिक्त कर्ज़ का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकार एक ओर विकास के लिए कर्ज़ ले रही है, तो दूसरी ओर भ्रष्टाचार की जड़ें शासकीय तंत्र को खोखला करती दिख रही हैं। बढ़ते कर्ज़ और विभागों की अनियमितताओं ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। RED MORE :

PRA INFRA PROJECTS RAIPUR के ठेकेदार ने राजपत्रिय आदेश के नियमों की उड़ाई धज्जियां, SDO ने कबूला दबाव में आकर दिया था GeM पोर्टल का पासवर्ड।
PMN 24 CG NEWS: जल संसाधन विभाग, रायपुर जिले में PRA INFRA PROJECTS RAIPUR के ठेकेदार प्रणय जायसवाल द्वारा किए गए कार्यों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के दस्तावेज सामने आए हैं। यह पहली बार नहीं है जब इस फर्म का नाम गड़बड़ी में आया हो। प्रदेश के कई जिलों के शासकीय विभागों में भी इस फर्म द्वारा किए गए कार्यों में अनियमितताएं मिलने के अहम दस्तावेज PMN 24 मीडिया के हाथ लगे हैं। जल्द ही इस फर्म के अन्य काले कारनामों का खुलासा मीडिया के समक्ष किया जाएगा। जब PMN 24 मीडिया की टीम ने जल संसाधन विभाग रायपुर डिविजन के तत्कालीन SDO विजय वाहने से बड़े पैमाने पर हुए भ्रष्टाचार को लेकर सवाल किए, तो शुरुआत में उन्होंने किसी भी गलती से इंकार कर दिया और जिम्मेदारी अन्य अधिकारियों पर डालते रहे। लेकिन जब टीम ने दस्तावेज उनके सामने रखे, तो उन्होंने स्वीकार किया कि गलत सप्लाई का कार्य हुआ है। SDO विजय वाहने ने आगे बताया कि प्रोजेक्ट के बीच में ही उन्हें EE राकेश कुमार शर्मा द्वारा कार्यमुक्त कर ऑफिस में अटैच कर दिया गया, और उनकी जगह नए SDO अभिषेक दुबे को चार्ज दे दिया गया। उन्होंने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि उच्च अधिकारियों के दबाव में उन्होंने अपना GeM पोर्टल की ID और पासवर्ड ठेकेदार प्रणय जायसवाल को दिए थे, जिस पर ठेकेदार ने सभी वर्क ऑर्डर जारी किए। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी रिटायरमेंट में कुछ ही महीने बचे हैं, इसलिए वे दबाव में थे। जब PMN 24 मीडिया टीम ने जल संसाधन विभाग के EE राकेश कुमार शर्मा से भ्रष्टाचार को लेकर वर्जन लेने की कोशिश की, तो पहले उन्होंने मामले की कोई जानकारी नहीं होने की बात कही। जब उनसे पूछा गया कि आप विभागीय अधिकारी हो और आप अपने ही विभाग के कार्य से कैसे अनजान हो सकते हैं, तो उन्होंने गोलमोल जवाब देना शुरू कर दिया और थोड़ी बहुत गलती स्वीकार की।सवालों से बचते हुए वे अचानक ऑफिस से निकलकर अपनी गाड़ी में बैठकर चले गए। EE राकेश कुमार शर्मा के इस व्यवहार से यह साफ झलकता है कि ठेकेदार और विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हुआ है। PMN 24 मीडिया इस पूरे भ्रष्टाचार सिंडिकेट और PRA INFRA PROJECTS RAIPUR के काले कारनामों का विस्तृत खुलासा जल्द ही आपके सामने लाएगा। अधिकारियों और ठेकेदार की मिलीभगत से सप्लाई में करोड़ों रुपए के गबन का आरोप लगा है। विभाग के इलेक्ट्रिक विंग के EE आर.के. शर्मा और तत्कालीन SDO विजय वाहने द्वारा हाई मास्ट लाइट सप्लाई में मनमानी कर भारी कमीशनखोरी करने की बात उजागर हुई है।



